रविवार, 19 अप्रैल 2020

सौरमडंल का सम्पूर्ण ज्ञान : Saur Mandal GK

Solar System In Hindi

Solar System In Hindi

Saur Mandal GK


हमारा सौरमंडल


सौरमडंल किसे कहते हैं? 

सूर्य तथा उसके चारों ओर भ्रमण करने वाले ग्रहों, उपग्रहों, धूमकेतु, उल्काएँ, क्षुद्रग्रहों तथा अऩ्य आकाशीय पिण्डों के समूह को सौर मण्डल Solar System कहते है।

  • सूर्य एवं उसके चारों ओर भ्रमण करने वाले 8 उपग्रह, धूमकेतु उल्काएँ, तथा क्षुद्रग्रह संयुक्त रुप से सौर्यमण्डल कहलाते है। 
  • सूर्य जो कि सौर्यमण्डल का जन्मदाता है एक तारा है और ऊर्जा तथा प्रकाश प्रदान करता है। 
  • सूर्य की ऊर्जा का स्त्रोत उसके केन्द्र में हाइड्रोजन परमाणुओँ का हीलियम परमाणुओं नाभिकीय संलयन में बदलना है।
  • सौर्यमंडल के सभी पिण्ड गुरूत्वाकर्षण के कारण आपस में बंधे रहते है।
  • सौर्यमंडल के समस्त ऊर्जा का स्त्रोत सूर्य ही है।


विश्व भूगोल-ब्रह्माण्ड :


Geography ज्योग्राफी यूनानी भाषा के दो शब्दों Geo पृथ्वी Graphy ग्राफी अर्थात् नापना से बना हैं, जिसका अर्थ होता है पृथ्वी को नापना अर्थात् पृथ्वी का वर्णन करना। भूगोल पृथ्वी के अध्ययन से संबधित विघा है जिसके अंतर्गत आकाशीय पिण्डों, स्थल, महासागर, जीव जन्तुओं, वनस्पतियों, फलों और भू-धरातल औऱ भू-गर्भ कें उपस्थित प्रत्येक वस्तु का अध्ययन किया जाता हैं।

  • इरैस्टोस्थनीज प्रथम यूनानी वैज्ञानिक था जिसने भूगोल के लिए ज्योग्राफिका शब्द का इस्तेमाल किया था। इसे भूगोल का पिता भी कहा जाता हैं।
  • अनेक्जीमोडर ने सर्वप्रथम विश्व मानचित्र बनाया, जबकि विश्व ग्लोब का निर्माता मार्टिन बैहम था।
  • सर्वप्रथम यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने पृथ्वी को गोलभ कहा था।


ब्रह्माण्ड :



  • मानव मन में जब एक क्रमबद्ध इकाई के रूप में विश्व का चित्र उभरा तो उसने इसे ब्रह्माण्ड (Cosmos) की संज्ञा दे दी।
  • टॉलेमी ने सर्वप्रथम इसका नियमित अध्ययन प्रारम्भ किया औऱ बताया कि प़ृथ्वी ब्रह्माण्ड के केन्द्र मे स्थित हैं एवं सूर्य व अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा कर रहे हैं।
  • सन्-1543 में कॉपरनिकस ने यह बताया था कि पृथ्वी नही वरन् सूर्य की ब्रह्माण्ड के केन्द्र में स्थित है। पृथ्वी व अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा कर रहे हैं।
  • ग्रहों की गति का सर्वप्रथम प्रतिपादन केप्लर ने किया।
  • ब्रह्माण्ड के सामान्य स्थिति सिद्धांत के प्रवर्तक ऐब जॉर्ज  लेमेण्डर को माना जाता हैं।
  • ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के संबंध में दो प्रमुख वैज्ञानिक संकल्पनाएं प्रचलित है सामान्य स्थिति सिद्धांत एवं महाविस्फोट सिद्धांत।
  • सामान्य स्थिति सिद्धांत के प्रतिपादक वेल्जियम के खगोलविद् एवं पदारी जार्जलेमेण्टर ते।
  • अलेक्जण्डर फ्रीडमैन गोल्ड, हरमैन बॉण्डी एवं डॉ. एलेन सेण्डेजा ब्रह्माण्ड के महाविश्फोट सिद्धांत के प्रवर्तक कहलाते हैं।
  • टॉलेमी ने घोषणआ की कि सूर्य, चन्द्रमा एवं तारे पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं।
  • टॉलेमी ने मानचित्र बनाने तथा स्थानों की स्थिति दिखाने के लिए अक्षांश और देशांतर का ज्ञान भी दिया। इसलिए इन्हें मानचित्र कला का जनक भी कहा जाता हैं।
  • सर्वप्रथम पाइथागोरस एवं पाइलोलौस ने बताया था कि पृथ्वी स्थिर नहीं हैं बल्कि अपने अक्ष पर 24 घंटे में एक चक्कर लगाती हैं।
  • कापरनिकस ने 16वीं शताब्दी में कहा ता कि ब्रह्माण्ड के केन्द्र में सूर्य हैं न कि पृथ्वी हैं।
  • गैंलीलियों ने भी 17 जनवरी 1610 ई. को स्वनिर्मित दूरबीन की सहायता से सिद्ध किया था कि पृथ्वी आकाश की अन्य पिण्डों के समान साधारण पिण्ड हैं जो की सूर्य के चारों ओर धूमती हैं।


ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से संबंधित सिद्धांत :

  1. बिग बैंग सिद्धान्त (Big Bang Theory) ऐब जार्ज लैमेन्टर द्वारा।
  2. साम्यावस्था सिद्धान्त (Stready state Theory)थॉमस गोल्ड हर्मन वांडी द्वारा।
  3. दोलन सिद्धांत (Pulsating Universe Theory)डॉ एलन संडेज द्वारा।


बिग बैंग सिद्धान्त (Big Bang Theory) :

  • इसका प्रतिपादन वेल्जियम के खगोलज्ञ एवं पादरीऐब-जार्ज-लैमेन्टर ने 1966ई. में किया था।
  • इसके अनुसार लगभग 15 अरब वर्ष पूर्व एक गर्म सघन बिन्दु में नाभिकीय विखण्डन के कारण विस्फोट हुए जिसे ब्रह्माण्ड या बिग बैंग कहा गया।
  • इस परिघटना से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई औऱ उसमें लगातार विस्तार जारी हैं।


आकाश गंगा :

  • हमारी आकाश गंगा को मंकाकिनी कहा जाता हैं, मिल्की वे (Milky Way) रात के समय दिखने वाले तारों का समूह है जो हमारी आकाशगंगा का भाग है। ऑरीयननेबुला हमारी आकाशगंगा के सबसे शीतल औऱ चमकीले तारों का समूह  हैं।
  • ANDROMEDA हमारी आकाशंगगा के सबसे निकट की आकाशगंगा है।
  • सूर्य हमारी आकाशगंगा का एक तारा हैं।
  • Sirins or Dogstar सूर्य से दोगुने द्रव्यमान वाला तारा है।
  • प्रॉक्सिमा सेन्चुरी सूर्य का निकटतम तारा हैं।
  • आकाशगंगा तारो के समूह को आकाशगंगा कहते हैं। इसमें धूल और गैस भी पाई जाती है।
  • हमारा सौर्यमंडल जिस आकाशगंगा में स्थित हैं उसे मंदाकिनी कहते हैं, यह दुग्ध मेंखला भी कहलाती है। यह सर्पिलाकार है। नवीनतम ज्ञान मंदाकनी डवार्फ मंदाकनी है।
  • अल्फा सेन्चुरी समूह का तारा प्रॉक्सिमा सन्चुरी सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे नजदीक का तारा है। यह सूर्य से 4.3 प्रकाश वर्ष दूर है।
  • हमारी आकाशगंगा के सर्वाधिक नजदीक एड्रोमेडा आकाशगंगा है।


तारे—जन्म और मृत्यु जीवन चक्र :

  • आकाशगंगा के घूर्णन से ब्रह्माण्ड मे विघमान गैसों का मेघ प्रभावित होता है एवं परस्पर गुरूत्वाकर्षण के कारण उनके केन्द्र मे संलयन शुरू होता है व हाइड्रोजन के हीलियम मे बदलने की प्रक्रिय प्रारम्भ हो जाती है। इस अवस्था  मं यह तारा बन जाता है। केंद्र का हाइड्रोजन समाप्त होने के कारण तारे का केन्द्रीय भाग संकुचित व गर्म हो जाता है किन्तु बाह्म परत में हाइड्रोजन का हीलियम में बदलना जारी रहता है। धीरे धीरे तारा ठण्डा होकर लाल रंग का दिखने लगता है जिसे रक्त दानव कहते है। अब केन्द्र में हीलियम कार्बन में और कार्बन भारी पदार्थ में परिवर्तन होने लगता है। इसके फलस्वरूप तारें में तीव्र विस्फोट होता है जिसे सुपरनोवा Supernova कहते हैं। यदि तारे का द्रव्यमान 1.4 M.S जहाँ (MS सूर्य का द्रव्यमान है) से कम होता है तो वह अपनी नाभिकीय ऊर्जा खोकर श्वेत वामन में बदल जाता है। इसे जीवाश्म तारा कहते है।
  • तारा स्वप्रकाशित आकाशीय पिण्ड है। इसके केन्द्र में नाभिकीय संलयन शुरू होता है उसमे वृहत् ताप एवं प्रकाश उत्पन्न होता है।
  • वायुमंडल में प्रकाश के अपवर्तन के कारण तारे की टिमटिमाहट होती है।
  • उत्तर दिशा में दिखाई देने वाला तारा घ्रुव तारा कहलाता है।
  • श्वेत वामन ठण्डा होकर काला वामन Black Dwarf में परिवर्तित हो जाता है। 1.4 MS  को चन्द्रशेखर सीमा Chandra Shekhar Limit कहते है। इससे अधिक द्रव्यमान होने पर मुक्त इलेक्ट्रॉन अत्यधिक वेग पाकर नाभिक को छोड़कर बाहर चले जाते है और न्यूट्रॉन बचे रह जाते हैं। इस अवस्था को न्यूट्रॉन तारा या Pulsur कहते है।
  • इस परिघटना से ब्रह्माण्ड की उत्तपत्ति हुई और उसमें लगातार विस्तार जारी रहा।
  • अन्तरिक्ष में कुल 89 तारामण्डल हैं।
  • पृथ्वी एरावत पथ नामक आकाशगंगा का भाग हैं।
  • ब्रह्माण्ड में विस्फोटी तारा अभिनव तारा कहलाता हैं।


निहारिका : 

  • यह अत्यधिक प्रकाशमान आकाशीय पिण्ड है जो गैस और धूल कणों से मिलकर बना होता हैं।
  • Sirins or Dogstar सूर्य से दोगुने द्रव्यमान वाला तारा है।



राशियाँ :

  • सूर्य की परिक्रमा करते समय पृथ्वी 12 नक्षत्र समूहों से होकर गुजरती है जिन्हें राशियाँ Zodiac Signs कहते हैं। विभिन्न आकृतियों के अनुसार इनका नामकरण इस प्रकार किया गया है, मेष—Aries, वृष—Taurus, मिथुन—Gemini, कर्क—Cancer, सिंह—Leo, कन्य—Virgo, तुला—Libra, वृश्चिक—Scorpio, धनु—Sagittarius, मकर—Capricorn, कुम्भ—Aquarius, मीन—Pisces



तारामण्डल :

  • तारों के समूह को तारामंडल कहते है हाइड्रा सबसे बड़ा तारामंडल है। वर्तमान में 89 तारामंडलों की खोज व पहचान की जा चुकी है।
  • तारामंडल Constellations  कई तारों प्रायः 7 के समूह होते है। जिसके एक विशेष आकृति होती है। उदाहरणार्थ—सप्तऋषी तारामण्डल की आकृति भालू से मिलती है। विभिन्न तारामण्डल वर्ष के विभिन्न समयों पर दिखाई पड़ते है। किसी तारामण्डल का सर्वाधिक चमकदार नक्षत्र अल्फ नक्षत्र Alfa star उससे कम चमकदार नक्षत्र वीटा नक्षत्र इसी प्रकार गामा नक्षत्र आदि कहलाते है।


सूर्य की संरचाना :

  • सूर्य का जो भाग हमें आँखों से दिखाई देता है उसे प्रकाश—मण्डल कहते है।
  • सूर्य का वह भाग जो हमें सूर्यग्रहण के समय दिखाई देता है, कोरोना Corona  कहलाता है।
  • सूर्य की सतह का तापमान अनुमानत 6000 डिग्री C होता है।
  • सूर्य में बहुत बड़ी गुरूत्वाकर्षण शक्ति विघमान है, जिसका अन्य ग्रहों पर 12 मील प्रति सेकण्ड की दर से प्रभाव होता है।
  • सूर्य का व्यास 13,92,2000 किमी. है जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना अधिक है।
  • सूर्य की ऊर्जा का स्त्रोत उसके केन्द्र में हाईड्रोजन परमाणुओं का नाभिकीय सलयन द्वारा हीलियम में बदलना है।
  • सूर्य की पृथ्वी से न्यूनतम दूरी 14.70 करोड़ किमी. अधिकतम दूरी 15.21 करोड़ किमी. तथा औसत दूरी 14.98 करोड़ किमी. है।
  • सूर्य के प्रकाश की चाल 3x108 m/s 3 लाख किमी/सेकेण्ड है।
  • सूर्य के प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहते है। एक प्रकाश वर्ष=9.45x1013 km तथा एक पारसेक दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई =3.6 प्रकाश वर्ष होता है।
  • सूर्य की आयु 5 बिलियन वर्ष है और सामान्य तारे का जीवन काल 10 बिलियन वर्ष होता है।
  • सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000 डिग्री C होता है।
  • सूर्य से उत्सर्जित सौर्य ज्वाला को उत्ततरी घ्रुव पर औरोरा बोरियालिसि तथा दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा आस्ट्रेलिस कहते है।


सौर्यमंडल के पिण्ड :

  • अंतर्राष्ट्रीय खोगलशास्त्रीय संगठन (आई.ए.यू) के अगस्त 2006 के प्राय चेक गणराज्य सम्मेलन मे ग्रहों को नये परिदृश्य में परिभाषित किया गया है। जिसके तहत ग्रह वह खगोलीय पिण्ड हैं जो 1—सूर्य के परितः घूमता हो, 2—गूरुत्वाकर्षण बल हो ताकि गोल स्वरूप को बनाए रख सके।, 3—उसके आसपास अन्य खगोलीय पिण्डों की भीड़ न हो। इस आधार पर यम प्लूटो को बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है।
  • आई.ए.यू. के अनुसार ग्रहों को दो भागों में बाटा गया है—
  • पार्थिव या आतरिक ग्रह—बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल।
  • बृहस्पतीय या बाह्म ग्रह—बृहस्पति, शनि, अरुण, वरूण।
  • नंगी आँखों से देखे जानेवाले ग्रह—बुध्, शुक्र, शनि, बृहस्पति, मंगल
  • आकार की दृष्टि से ग्रहों का क्रम (घटते क्रम में)—बृहस्पति, शनि, अरुण, वरूण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल, बुध।
  • केवल शुक्र एवं वरूण (यूरेनस) यूर्य की परिक्रमा पूर्व से पश्चिम दिशा (Anti-Clockwise)  में करते हैं।



बुध (Mercury) :

  • यह सूर्य का सबसे निकटतम तथा सौर्यमंडल का सबसे छोटा ग्रह है जिसके पास कोई उपग्रह नही है।
  • यह सूर्य की परिक्रमा 87 दिन 23 घंटे मे करता है।
  • यहाँ पर वायुमंडल नहीं है। अतः जीवन असंभव है।
  • इस ग्रह का सबसे विशिष्ट गुण इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना है।
  • बुध के सबसे पास से गुजरने वाला कृत्रिम उपग्रह मैरिनर-10 है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। यह  सौर्यमण्डल का सबसे तीव्र गति से धूमने वाला ग्रह है।
  • बुध का व्यास 4878 किमी. और सूर्य से दूरी 5.7 करोड़ किमी. है। यह 88 दिनों में ही सूर्य की प्रदक्षिणा कर लेता है। बुध अपने दीर्घवृत्तीय कक्ष में 1,76,000 किमी. प्रतिघण्टे की गति से घूमता है।
  • यह गति इसे सूर्य की गुरूत्वाकर्षण शक्ति की पकड़ से सुरक्षित रखती है।
  • बुध ग्रह पर दिन अति गर्म और रात बर्फीली होती है।
  • बुध का एक दिन पृथ्वी के 90 दिनों के बराबर अवधि का और इतने ही समय की एक रात होती है। परिमाण मे यह पृथ्वी का 18वाँ भाग है तथा इसका गुरूत्वाकर्षण पृथ्वी का 3/8 भाग है, इसका द्रव्यमान पृथ्वी का 5.5 प्रतिशत हैं।



शुक्र :

  • यह पृथ्वी का सबसे निकटतम सौर्यमंडल का सबसे चमकीला औऱ सबसे गर्म ग्रह है।
  • इस ग्रह को प्रेशर कुकर (लैनेट) के उपनाम से भी जाना जाता है।
  • यह शाम मे पश्चिम दिशा में एवं सुबह में पूर्व दिशा में दिखाई देता है।
  • इसके वायुमंडल मे कार्बन डॉइऑक्साइड की मात्रा अधिक लगभग 97 प्रतिशत होती है।
  • आकार एवं द्रव्यमान में पृथ्वी के समान होने के कारण इसे पृथ्वी की बहन (जुड़वा ग्रह) कहा जाता है।
  • सर्वाधिक चमकीला होने के कारण इसे प्यार एवं सुन्दरता की देवी कहा जाता है।
  • शुक्र के वायुमण्डल में कार्बनडाइऑकसाइड की प्रचुरता (90-95) प्रतिशत तक है। इसके कारण यहाँ प्रेशर कुकर की दशा होती है। बुध की तरह इसका भी कोई उपग्रह नही है। यह अन्य ग्रहों की विपरीत पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर सूर्य का परिक्रमण करता है।
  • बुध के बाद यह सूर्य का निकटतम ग्रह है और लगभग पृथ्वी के बराबर आकार तथा भार का है। इसका व्यास 12,102 किमी. और सूर्य से दूरी 10.82 करोड़ किमी. है।
  • यह सूर्य की प्रदक्षिणा 225 दिन में पूरी करता है। शुक्र गर्म और तपता हुआ ग्रह है। तथा इसके चारों ओर सल्फ्यूरिक एसिड के जमे हुए बादल है। खोजों औऱ रडार मैपिंग से इसके बादोलं को भेद करने का पता चला है कि शुक्र की सतह चट्ठानों औऱ ज्वालामुखियों की है। वह पृथ्वी के अति निकट है और सूर्य व चन्द्रमा को छोड़कर सबसे चमकीला दिखाई पड़ता है। चन्द्रमा की भाँति इसकी भी कलाएँ है। प्रातः पूर्व में और सायं पश्चिम में दिखाई पड़ने के कारण इसे भोर का तारा (Morning Star) और सांक्ष का तारा (Evening Star) भी कहते है।
  • आकार औऱ द्रव्यमान में पृथ्वी से थोड़ा छोटा होने के कारण कुछ खगोलशास्त्री इसे पृथ्वी की बहिन भी कहते है। शुक्र का वायुमण्डलीय दाब पृथ्वी से 100 गुना है।



पृथ्वी :

  • यह सूर्य से दूरी के क्रम मे तीसरा ग्रह है एवं सभी ग्रहों में आकार में पाँचवाँ स्थान रखता है। यह अपने अक्ष पर 23½ डिग्री झुकी हुई है। अन्तरिक्ष से जल की अधिकता होने के कारण यह नीला दिखाई देता है। अतः इसे नीला ग्रह भी कहते है। यह सूर्य की प्रदक्षिणा 36¼ दिन में पूरा करता है। इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है।
  • पृथ्वी सौर्यमंडल का एकमात्र ग्रह है जहाँ जीवन है।
  • यह सूर्य की दूरी से तीसरा औऱ आकार की दृष्टि से पांचवाँ बड़ा ग्रह है. यह सूर्य और मंगल ग्रह के बीच मे स्थित है।
  • पृथ्वी एक कल्पित धुरी पर हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन अथवा आवर्तन गति कहा जाता है।
  • पृथ्वी की घूर्णन या दैनिक गति के कारण दिन रात होता है।
  • पृथ्वी को सूर्य की क परिक्रमा करने में लगे समय को सौर्य वर्ष कहा जाता है। प्रत्येक सौर्य वर्ष, कलेण्डर वर्ष के लगभग 6 घंटा बढ़ जाता है, जिसे हर चौथे वर्ष में लीप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है। लीप वर्ष 366 दिन का होता है जिसके कारण फरवरी माह में 29 दिन होते है।
  • पृथ्वी पर 71 प्रतिशत जल तथा 29 प्रतिशत स्थल है।
  • पृथ्वी का अक्ष पर 23½  डिग्री झुकी हूई है।
  • पृथ्वी की आयु 4.6 बिलियन वर्ष है।
  • पृथ्वी का अक्ष इसकी कक्षा के सापेक्ष 66½ डिग्री का कोण बनाती है।
  • समुद्रतल से पृथ्वी की सर्वाधिक ऊँचाई 8848 मीटर (माउंट एवरेस्ट) है।
  • समुद्रतल से सागर की सर्वाधिक गहराई 11,033 मीटर (मैरियाना गर्त्त) प्रशांत महासागर है।
  • पृथ्वी औऱ चन्द्रमा के बीच की औसत दूरी करीब 4 लाख किमी. है।



मंगल :

  • यह सूर्य से चौथा ग्रह है। वायकिंग कि खोज से ज्ञात हुआ है कि यहाँ जीवन की कोई सम्भावना नही है।
  • मगंल की बंजर भूमि का रंग गुलाबी है, अतः इसे लाल ग्रह  (Red Planet) भी कहते है।
  • यहाँ चट्टाने व शिलाखण्ड है। यहाँ का वायुमण्डल अत्यन्त विरल है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड पायी जाती है औऱ कुछ मात्रा में जलवाष्प अमोनिया एवं मीथेन भी है।
  • मंगल ग्रह में पृथ्वी के समान दो ध्रुव (Poles) हैं तथा इसका कक्षा तल पृथ्वी सें 25 डिग्री को कोण पर झुका है जिससे यहाँ पृथ्वी के समान ऋतु परिवर्तिन होता है।
  • मंगल की सतह लाल होने का कराण इस लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। यह पृथ्वी के अलावा एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिस पर जीवन की सम्भावना व्यक्त की जाती है।
  • मंगल के दो उपग्रह है जिनका नाम फोबोस तथा डीमोस है। इसका सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलंपिया है जो एवरेस्ट से लगभग तीन गुना ऊँचा है।
  • आयरन ऑक्साइड के कारण इस ग्रह का रंग लाल है।
  • इसके अक्षीय झुकाव एवं दिन का मान पृथ्वी के समान है।
  • यह अपनी धूरी पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है तथा सूर्य की परिक्रमा में इसे केवल 689 दिन लगते है।
  • ओलिम्पस मोन्स मंगल ग्रह का सबसे बड़ा ज्वालामुखी है।

सौर्यमंडल संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य :

सबसे बड़ा ग्रह
बृहस्पति
सबसे छोट ग्रह
बुध
सूर्य का निकटतम ग्रह
बुध
सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर स्थित ग्रह
वरुण
पृथ्वी का सर्वाधिक निकटतम ग्रह
शुक्र
सर्वाधिक चमकीला ग्रह
शुक्र
सर्वाधिक गर्म ग्रह
शुक्र
सर्वाधिक ठंडा ग्रह
वरुण

लाह ग्रह
मंगल
सर्वाधिक बड़ा उपग्रह
गेनीमेड
सर्वाधिक छोटा उपग्रह
डीमोस
नीला ग्रह
पृथ्वी
भोर का तारा
शुक्र
सांझ का तारा
शुक्र
लाला धब्बा प्रतीत होता ग्रह
शुक्र
सर्वाधिक चमकीला तारा
साइरस

सौर्यमंडल का सबसे नजदीक तारा
प्रॉक्सिमा सेन्चुरी
सबसे तेज गति से घूर्णन करने वाला ग्रह
बृहस्पति
सबसे धीमी गति से घूर्णन करने वाला ग्रह
शुक्र
सबसे तेज गति से परिक्रमण करने वाला ग्रह
बुध
सबसे धीमी गति से परिक्रमण करने वाला ग्रह
वरूण


बृहस्पति :

  • यह सौर्यमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह है।
  • बृहस्पति के 68 उपग्रह है जिसमें गैनिमीड सबसे बड़ा है।
  • यह तारा और ग्रह दोनों के गुणों से युक्त होता है क्योंकि इसके पास स्वयं की रेडियों ऊर्जा है।
  • यह सूर्य से पाँचवाँ ग्रह है औऱ सौर्यमण्डल के ग्रहों मे सबसे बड़ा है। इसका व्यास 1,38,081 किमी. और सूर्य से औसत दूरी 77.83 करोड़ किमी है। यह सूर्य की प्रदक्षिणा में 11.9 वर्ष लगाता है।
  • सौर्यमंडल का सबसे बड़ा ग्रह होने के कारण इसे मास्टर ऑफ गॉड्स कहा जाता है।
  • इसमें अपने धूरी पर एक चक्कर लगाने में 10 घंटा (सबसे कम) तथा सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष का समय लगता है।



शनि :

  • यह आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • इसके ज्ञात उपग्रहों में से टिटॉन शनि का सबसे बड़ा उपग्रह हैं जिसका आकार लगभग बुध के बराबर है।
  • सूर्य से छठा ग्रह शनि का आकार में सौर्यमण्डल का दूसरा बड़ा ग्रह है।
  • इसका व्यास 1,20,500 किमी. है और यह सूर्य से 142.7 करोड़ किमी. दूर है।
  • यह सूर्य की परिक्रमा 30 वर्ष में पूरी करता है।
  • शनि की यह सबसे बड़ी विशेषता है कि इसके चतुर्दिक वलय है जो अनन्त छोटे छोटे कणों से बने हुए है।
  • आकाश में यह ग्रह पीले तारे का समान दृष्टिगत होता है।
  • बृहस्पति के समान शनि पर भी मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम गैसें पायी जाती है और कुछ मात्रा में मीथेन औऱ अमोनिया भी विघमान है।
  • यह सौर्यमंडल का चपटा ग्रह है, इसे गैसों का गोला भी कहा जाता है।
  • इस ग्रह में चारों ओर गैसों का छल्ला पाया जाता है।
  • इसे नग्न आँखों से देखा जाने वाला अन्तिम ग्रह है।
  • शनि का उपग्रह फोर्ब्स शनि की कक्षा के विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।



अरूण :

  • यह भी शुक्र की भाँति सूर्य का परिक्रमण पूर्व से पश्चिम दिशा में करता है।
  • शुक्र को दूरदर्शी से देखने पर यह रहे रंग का दिखाई पड़ता है।
  • शुक्र की खोज 1781 ई. में सर विलियम हरशेल ने की थी।
  • इसकी सूर्य से दूरी 287 करोड़ किमी. और व्यास 51,400 किमी, है।
  • यह ग्रह सूर्य की प्रदक्षिणा में 84 वर्ष का समय लगाता है।
  • अरूण एकमात्र ऐसा ग्रह है जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक अपनी प्रदक्षिणा कक्ष मे सूर्य के समान रहता है।
  • अरूण ग्रह का नामकरण ग्रीक देवता यूरेनस के नाम पर किया गया।
  • यह सौर्यमण्डल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • शुक्र ग्रह का तापमान 27 डिग्री है।
  • यहाँ पर सुर्योदस पश्चिम की ओर औऱ सूर्यास्त पूर्व की ओर होता है।
  • यह अपने धूरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ सा दिखाई पड़ता है जिसके कारण इसे लेटा हुआ ग्रह भी कहा जाता है।



वरुण :

  • वरुण की खोज 1846 ई. में जर्मन खगोलविद् जोहान गोले ने की थी।
  • यह सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर स्थित ग्रह है।
  • इसके उपग्रहों की कुल संख्या 14 है जिसमें ट्रिटॉन और नेरीड प्रमुख है।
  • अरूण की कक्षा में विसंगति के फलस्वरूप की।
  • इसका व्यास 48,600 किमी. है और यह सूर्य से 497.0 करोड़ किमी. दूर है।
  • यह सूर्य की प्रदक्षिणा 164.8 वर्षों में पूरी करता है और अपनी धुरी पर 16 घण्टें में पूरा चक्कर लगाता है।
  • यह ग्रह हल्का पीला दिखाई देता है।
  • वायजर-2 ने वरुण  के निकट पहुँचकर कई नवीन जानकारियाँ दी हैं।



नवाँ ग्रह :

  • 1987 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका की नासा अनुसन्धानशाला ने सौरमंडल के 9वें ग्रह की खोज की है। यह ग्रह पृथ्वी से 5 गुना भारी है और सूर्य की प्ररिक्रमा 700 वर्ष में पूरी करता है। इस ग्रह को कारला नाम दिया गया है।
  • सेरेस, शेरान और 2003 यू.वी या जेना क्रमशः 10,11,12 ग्रह होंगे।



उपग्रह :

  • ये ग्रहों के चारों ओर चक्कर लगाते है। इनका स्वयं का प्रकाश नहीं होता है, जैसे चन्द्रमा



चन्द्रमा :

  • चन्द्रमा की सतह और उसकी आन्तरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलॉजी कहलाता है।
  • चन्द्रमा का उच्चतम पर्वत लीवनिट्स पर्वत है यह चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित है।
  • चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घण्टे में पूरी करता है। इतने ही समय में अपने कक्ष पर एक घूर्णन करता है। यही कारण है कि चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग 57% दिखाई पड़ता है।
  • सूर्य के संदर्भ मे चन्द्रमा की परिक्रमा की अवधि 29.53 दिन होती है। इस समय को एक चन्द्रमास या साइनोडिक मास कहते है।
  • चन्द्रमा की चट्टानों में टाइटेनियम की मात्रा अत्यधिक मात्रा पाई जाती है।
  • चन्द्रमा से पृथ्वी पर प्रकाश पहुँचने में 1.28 सेकेण्ड का समय लगता है।
  • चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण का मान पृथ्वी के सापेक्ष 1/6 है। इसका कारण चन्द्रमा पर वायुमंडल का अभाव है।
  • सी ऑफ ट्रैक्विलिटी चन्द्रमा का वह स्थान है जहाँ 21 जुलाई 1969 को अपोलो 11 से पहले चन्द्रमा यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने कदम रखा था।
  • नील आर्मस्ट्रांग द्वारा चन्द्रमा से लाये गए चट्टानों में टाइटेनियम की अत्यधिक मात्रा पायी गयी साथ ही साथ पृथ्वी तथा चन्द्रमा की प्राचीनता समान समझी गयी।



छुद्र ग्रह यम (Pluto) :

  • यम को आई.ए.यू ने 2006 में ग्रह का दर्जा समाप्त कर बौने ग्रहों की श्रेणी मे रख दिया।
  • आ.ई.यू ने 2008 में ग्रहों की नई श्रेणी प्लूटोइट बनाया है और यम को इसी में रखा गया है।
  • प्लूटोइड (बौने ग्रह) श्रेणी के अन्य ग्रह है—सेंरस, चेरॉन, 2003 यूबी 313 (इरिस)।



पुच्छल तारे या धूमकेतु (Comtes) :

  • ये सौर्यमंडल के सबसे अधिक उत्केन्द्रित कक्षा वाले सदस्य है, जो सूर्य के चारों ओर लम्बी, किन्तु अनियमित कक्षा में घूमते है। ये आकाशीय धूल, बर्फ औऱ हिमानी गैसो के पिण्ड है जो सूर्य से दूर ठण्डे और अन्धेरे वाले क्षेत्र में रहत है और अपनी कक्षा में घूमते हुए कई वर्षों के पश्चात् जब ये सूर्य के समीप से गुजरते है तो गर्म होकर गैसों की फुहार निकलती है जो एक लम्बी चमकीली पूँछ के समान प्रतीत होती है। यह पूँछ कभी कभी तो लाखों किमी. लम्बी होती है।
  • सामान्य अवस्था में पुच्छल तारा बिना पूँछ के होता है परन्तु जैसे ही वह सूर्य के निकट आता है तो, सूर्य की गर्मी के कारण इसकी ब्रह्म परत पिघलकर गैस मे परिवर्तित हो जाती है।
  • 1843 में विशाल पुच्छल तारा दृष्टिगत हुआ था जिसकी पूँछ 80 करोड़ किमी लम्बी थी। 1986 में हैली पुच्छल तारा तो हम सभी ने देखा ही है।



हैली पुच्छल तारा :

  • 76.3 वर्षों के अन्तराल के बाद सूर्य के निकट आया था, तब इसे बिना दूरदर्शी यंत्र के भी देखा गया था।
  • ऐंकी धूमकेतु हर 3,3 वर्ष बाद सूर्य के समीप से गुजरता है।
  • काहुतेक धूमकेतु जो 1974 में दिखाई दिया था। अब 75 हजार वर्ष बाद दिखाई देगा।


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