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Teachers Day Essay in hindi | शिक्षक दिवस पर निबंध 2021

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Teachers Day Essay in Hindi-शिक्षक दिवस पर निबंध-

किसी भी शिक्षा पद्धति में अध्यापक का प्रमुख स्थान होता है। समूची शिक्षा पद्धति अध्यापक के इर्दगिर्द ही घूमती है। अध्यापक के बिना स्कूल एक निर्जीव शरीर के समान है। वह विघार्थियों का आध्यात्मिक एवं बौद्धिक पिता है। वह विघार्थियों को अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है और सभ्यता के दीपक को हमेशा प्रज्ज्वलित रखता है। वह विघार्थियों के शारीरिकस बौद्धिक, भावात्मक सामाजिक नैतिक सास्कृतिक तथा आध्यात्मिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। वह विघार्थियों को पशुत्व से मनुष्यत्व की ओर ले कर जाता है अध्यापक ही है जो किसी के जीवन को जीने योग्य बनाता है। वह राष्ट्र निर्माता होता है। उसका प्रभाव केवल किसी प्रदेश या प्रान्त तक ही सीमित नही रहता बल्कि समूचे राष्ट्र में और राष्ट्र से भी बाहर विदेशों में भी फैला रहता है। प्लेटो अरस्तू सुकरात गुरूनानक, स्वामी विवेकानन्द, महात्मागाँधी जैसे महान अध्यापकों का प्रभाव समूचे विश्व में फैला हुआ है। पश्चिमी और पूर्वी देशों के कई महान व्यक्तियों ने अध्यापकों की महानता को स्वीकार भी किया है।

शिक्षक दिवस पर निबंध 2021- Teachers Day Essay in hindi

शिक्षक दिवस पर निबंध 2021- Teachers Day Essay in hindi



शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है (Teachers Day Essay and Speech in Hindi) 

भारत के हमारे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के दिन ही 5 सितंबर 1962 को Teachers Day मनाया जाता है।


मार्गदर्शक के रूप में शिक्षक (Teacher as a Guide) Essay on Teachers Day in Hindi 2021

  1. शिक्षक मार्गदर्शक के रूप में निम्न प्रकार से भूमिका निभाता है।
  2. एक आदर्श शिक्षक का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्तव छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढने में सहायता करना है। इस तरह वह मार्गदर्शक की भूमिका का निर्वहन करता है।
  3. उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनना।
  4. एक अच्छा शिक्षक वह है जो विघार्थियो को अनुशासन और लक्ष्य के प्रति जागरूक करे। इससे छात्र वास्तविकता से भी जुड़ता है और वह समय के अनुकूल अपने कार्य को करता है।
  5. शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा ही शिक्षार्थी के सर्वागीण विकास का मूल आधार है।
  6. छात्र को उसके अन्दर मौजूद क्षमताओं योग्याताओ की जानकारी देना।
  7. विघार्थियों की समस्या से संबंधिक सूचनाओं कों एकत्रित करना।

Shikshak Diwas Essay in Hindi- शिक्षक दिवस के लिए निबंध-

मनु का विचार- भारत के प्राचीन मुनि मनु ने कहा है अध्यापक ब्रहा का रूप है। पिता प्रजापति का रूप है और माता धरती का रूप है। उन्होने कहा है माता की भक्ति से बच्चा इस संसार को प्राप्त करता है पिता की भक्ति से वह अंतरिक्ष को प्राप्त करता है।

एक भारतीय प्रार्थना- गुरू ब्रह्मा है, विष्णु है, महेश्वर है। वह समस्त ब्रहमाण्ड है। उसे प्रणाम है।

कबीर का विचार- गुरू गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूँ पाय। बलिहारी गुरू आपने, जिन गोविन्द दियो बताय।

हुमायूँ कबीर का विचार- अध्यापक वास्तविक रूप से राष्ट्र के भाग्य निर्माता है।

 

अध्यापक एक सश्क्त तत्व के रूप में- शिक्षा पद्धति में अध्यापक को ही अत्यन्त सशक्त तत्व समझा जाता है। कोठारी आयोग के अनुसार- शिक्षा के स्तर तथा राष्ट्रीय विकास में सहयोग को प्रभावित करने वाले सभी विभिन्न तत्वों में अध्यापकों का गुण, चरित्र तथा उनकी योग्यता ही अत्यधिक महत्वपूर्ण है। वह शिक्षा के गुणात्मक स्तर  की कुंजी है। 

शिक्षा का समूचा ढाँचा उसके प्रशिक्षण तथा उसकी शैक्षणिक योग्यताओं पर आधारित होता है। सेकेण्डरी शिक्षा आयोग ने भी इस तथ्य की ओर इंगित करते हुए कहा है कि सर्वोत्तम पाठ्यक्रम भी तब तक जीवित रहता है जब तक उचित शिक्षण विधियों तथा अच्छे अध्यापकों द्वारा उनसे साँस फूँकी जाये।


हुमायूँ कबीर का कथन है अच्छे अध्यापकों के अभाव से सर्वोत्तम विधियां भी असफल हो जाती है। अच्छे अध्यापकों के साथ पद्धति के दोषो को भी अधिकांश रूप से दूर किया जा सकता है।

Teachers Day Essay and Speech in Hindi-

अध्यापक हमारे भविष्य का संरक्षक और निर्माता होता है- अध्यापक हमारे भविष्य का संरक्षक है। भूतपूर्वक प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी के कथनानुसार- राष्ट्र का हित अध्यापक के हित पर निर्भर है। हमारे बीस लाख अध्यापक हमारे भविष्य के संरक्षक है। हम अध्यापको को सम्मानित करने तथा पालने की बात करते है परंतु क्या हमारे कार्य हमारी कथनी के अनुरूप होते है, हमें केवल अध्यापकों को आत्म बलिदान की शपथ से बाँधे रखने का कोई अधिकार नही है। अध्यापक हमारे भविष्य का निर्माता है कोई भी समाज उसकी उपेक्षा नही कर सकता है।

 

अध्यापक राष्ट्र निर्माता के रूप में- अध्यापक को राष्ट्र निर्माता समझा जाता है। प्रो हुमायूँ कबीर अध्यापक को राष्ट्र का भाग्य निर्माता कहते है उसका संबंध उन बच्चो के साथ होता है जिन्हे कल देश का सशक्त नेता बनना है। राष्ट्र का भविष्य विघा के मंदिरों में शिक्षा प्राप्त कर रहे भावी नागरिकों पर निर्भर करता है। राष्ट्र निर्माण का दायित्व अध्यापकों पर ही है।

 मेरे पसंदीदा शिक्षक पर निबंध हिन्दी में-Short and Simple Essay on Teachers Day in Hindi 2021

अध्यापक समाज की रीढ़ की हड्डी है- अध्यापक हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी है विशेषकर उन सुदूर गाँवों में जहाँ स्कूल सामुदायिक जीवन का केन्द्र होता है। अध्यापक पढ़े लिखे परिवारों के बीच में महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। वह राष्ट्र को एकता  के सूत्र में पिरोता है तथा लोगो का मित्र सहायक एवं निर्देशक होता है। वह सभ्यता के दीप को हमेश उज्ज्वलित करता है वह हमारे भविष्य का निर्माता होता है।

 

अध्यापक एक सामाजिक इंजीनियर एवं सामाजिक कार्यकर्ता होता है- अध्यापक सामाजिक इंजीनियर तथा उपयोगी सामाजिक कार्यकर्ता होता है। वह समाज के आदर्शों मूल्यों तथा उसकी परम्पराओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है वह समुदाय का परामर्शदाता होता है और विघार्थियों तथा उनके माता पिता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। यहाँ तक कि लोग अपने पारिवारिक  कार्यों में भी अध्यापकों का परामर्श लेते है। लगभग सभी प्रगतिशील देशों में अध्यापकों ने अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अपने समाज को संवृद्धि तथा प्रगति के मार्ग पर अग्रसर किया है।

 

अध्यापक सतत् प्रभावशाली- अध्यापक विघार्थियों की आदतों रूचियों तथा उनके व्यवहारों और चरित्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे अध्यापकों की आवश्यकता होती है। यह आदिकाल से प्रभावित करता आया है और हमेशा ही प्रभावित करता रहता है। उसका प्रभाव कभी भी समाप्त नही होता है।

 

सुविधाप्रदाता के रूप में शिक्षक- सुविधाप्रदाता के रूप में शिक्षख एक समय भूमिका निभाता है जो शिक्षक की क्षमताओं और सामान्य ज्ञान के कई पहलुओं का आह्वान करती है। इसे उचित रूप से परिभाषित करना कठिन है। यह शिक्षक का एक और अधिक जटिल दृश्य को विकसित करने में सबसे महत्वपूर्ण अग्रिमों मे से एक है। जो शिक्षक छात्रों में व्यक्तिगत विकास को प्रेरित करते है वे बेहद समर्पित असाधारण योग औऱ अद्वितीय होते है। इसके लिए उनमें एक आत्मविश्वास है।

 

शिक्षक छात्र की आंतरिक शक्तियों के विकास में मदद करता है जिनसे छात्र स्वयं भी परिचित नहीं है। यह वही अपरिभाष्य अंतर है जो प्रशिक्षण और शिक्षा उपदेश औऱ शिक्षण के मध्य होता है। जब शिक्षक सुविधाप्रदाता के रूप में होता है तो कक्षा में छात्रों के व्यक्तित्व के विकास में उन्नयन वृद्धि होती है। सीखने की प्रक्रिया में शिक्षक केंद्रिय भूमिका में होते है।

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वर्तमान युग में शिक्षा प्रक्रिया मे से सूचना और तकनीक का आगमन हो गया है। आईसीटी का उपयोग कर रहे शिक्षक के सुविधाप्रदाता की भूमिका में बदलाव होने से शिक्षकों द्वारा कक्षा मे नेता के रूप मे सेवा करने की जरूरत समाप्त नही हो जाती है।

 

शिक्षक के पारम्परिक नेतृत्व कौशल और उनका प्रयोग अभी भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से उनके लिए जो पाठ बनाना महत्वपू्र्ण है अनुसंधान से पता चलता है कि जहाँ योजना अनुचित रूप से बनाई गई हो वहाँ छात्र का काम अक्सर विकेन्द्रित होता है और इससे लक्ष्य प्राप्ति में कमी आ सकती है।

 

अतः एक कुशल सुविधाप्रदाता के रूप में शिक्षक कक्षा में उचित वातावरण का निर्माण करे। तदपि विषय वस्तु के उचित अधिगम के लिए छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करे। उचित विश्लेषण निरीक्षण करने में मार्गदर्शन देने में समर्थ हो ताकि छात्र स्वयं उत्तर खोजने के लिए प्ररित हो व अन्ततः उत्तर तक पहुच सके और भूमिका में शिक्षक को सरलीकरण का दृष्टिकोण रखना चाहिए। व्याख्यान देने और उपदेश से बचा चाहिए। अधिक विश्वासी और प्रबल को चर्चा का नियंत्रण या संचालन की अनुमति न दे। पूर्व परिदृ्शय में शिक्षार्थी एक निष्क्रय भूमिका निभाता है इस परिदृश्य में शिक्षार्थी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाता है इससे शिक्षक की बदलती भूमिका भी परिलक्षित होती है। सीखने के लिए रचनावादी दृश्टिकोण की आवश्यकता होती है। जिसमें शिक्षक द्वारा ज्ञान देने के अलावा छात्रों द्वारा स्वयं ज्ञान के निर्माण पर जोर दिया जाता है।

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